अज़माइशों से ही गुज़रती है ज़िंदगी मोमिन की हमेशा ही खुश रहो ये कैसी तुम्हारी मिन्नत है जद्दोजहद ही मुक़द्दर रहेगा अबाबील तुम्हारा दिल से निकाल दो की सिर्फ मीठा खाना ही सुन्नत है
3-Ramzan Youm E Wisal Shehzadi E صلى الله عليه Rasool Zauja E 6 Maula E Kainat Madar E Hasnain Karimain Khatoon E Jannat Hazrat Sayyedna Bibi Fatimah Zahra Radi Allahu Ta'ala Anha
लड़खड़ाते हैं कदम हालाते "रोज़े" में थोड़ा चलने के बाद कैसे चला होगा काफ़िला कर्बला में "हुसैन" की शहादत के बाद प्यासे असगर का कर्बला में वो मंजर तो सोच तू भूल जाएगा कहना की रोजेदार हूँ मैं