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तकब्बुर चाहे दौलत का हो, ताक़त का हो, रुत्बे का हो, हैसियत का हो, इल्म का हो, सेहत का हो, हस्ब-ओ-नस्ब का हो, हत्ता कि तक़वा का ही क्यों न हो, बिल-आख़िर इंसान को रुस्वा करके ही छोड़ता है। अल्लाह की अता-करदा नेअमतों पे तकब्बुर नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह का शुक्र अदा करनी चाहिए !

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